Pandit Ravi Shankar Biography in Hindi | पंडित रविशंकर की सम्पूर्ण जीवनी हिंदी में

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Pandit Ravi Shankar
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Pandit Ravi Shankar Biography in Hindi | पंडित रविशंकर की सम्पूर्ण जीवनी हिंदी में

 

रविशंकर (Pandit Ravi Shankar) का जन्म वाराणासी के बंगाली ब्राह्मण परिवार में हुआ था | उनके सात भाई थे जिन में वो में वे सबसे छोटे थे | उनके पिता का नाम श्याम शंकर था और माता का नाम हेमांगिनी देवी था | उनके पिता बार एट ला थे तथा झालावाड में दीवान थे| प्रसिद्ध नर्तक उदयशंकर रविशंकर के भाई थे जिनके साथ रविशंकर 10 वर्ष की उम्र में पेरिस गये | 13 वर्ष की उम्र में ही उन्होंने नृत्य तथा बहुत से वाध्य बजाने सीख लिए थे | रविशंकर ने विदेश भ्रमण करते हुए वहा की प्रथाए एवं भाषाए भी सीखी |

1938 में उन्होंने नृत्य को अलविदा कहकर शास्त्रीय संगीत तथा सितार को गम्भीरता से सीखना शुरू किया | अलाउदीन खान के शिष्यत्व में 1944 तक सीखते रहे | कुछ समय उन्होंने इंडियन पीपल थिएटर एसोसिएशन (IPTA) के साथ काम किया तथा बैले के लिए संगीत रचनाये की | ‘सारे जहां से अच्छा हिंदोस्ता हमारा’ का संगीत बनाया तथा HMV के लिए संगीत रचनाये बनाई |

 

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1949-56 तक All India Radio में संगीत निर्देशक के रूप में काम किया तथा भारतीय राष्ट्रीय वाध्यवृन्द की स्थापना की | सत्यजीत रे के लिए संगीत रचनाये की | यहूदी मेन्युहिन् के सम्पर्क से उन्हें 1954 में सोवियत यूनियन में प्रस्तुती देने का अवसर मिला तो फोर्ड फाउंडेशन के द्वारा न्युयॉर्क में | यूरोप में उनके संगीत को मान्यता मिली तथा संयुक्त राष्ट्र संघ की दसवी वर्षगाँठ पर तथा पेरिस में यूनेस्को संगीत-उत्सव में उन्होंने अपना संगीत प्रस्तुत किया तथा प्रशंसा पायी |

अभारतीय फिल्मो में संगीत देने वाले वे प्रथम भारतीय थे | अनेक बार ग्रेमी अवार्ड तथा अन्य सम्मानों से सम्मानित रविशंकर ने लोस एंजेल्स में संगीत का स्कूल खोला तथा 1968 में My Music My Life नामक आत्मकथा प्रकाशित की | 1999 के पश्चात तो प्रतिवर्ष 25-40 संगीत सभाओं में वे प्रस्तुती देते रहे |

व्यक्तिगत जीवन में उन्होंने कई विवाह किये | अनुष्का शंकर तथा नोरा जोन्स प्रसिद्ध पिता की पुत्रिया है | दोनों ही संगीत के क्षेत्र में सक्रिय है तथा ग्रेमी अवार्ड जीत चुकी है |

 

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 श्री रविशंकर के विचार

“प्यार का रास्ता कोई उबाऊ रास्ता नही है… बल्कि ये तो मस्ती का मार्ग है. ये गाने का और नाचने का सबसे अच्छा मार्ग है…”

“अस्वीकृति का मतलब अपने आप में ही सिमित रहना है.”

“दूसरो की सुने, फिर भी न सुने. अगर तुम्हारा दिमाग उनकी समस्याओ में उलझ जायेंगा, तो ना सिर्फ वो दुखी होंगे, बल्कि तुम भी दुखी हो जाओंगे.”

“आज” भगवान का दिया हुआ एक उपहार है – इसलिए इसे “गिफ्ट” कहते है…”

“हमेशा आराम की चाहत में, तुम आलसी हो जाते हो. हमेशा पूर्णता की चाहत में पुम क्रोधित हो जाते हो. हमेशा अमीर बनने की चाहत में तुम लालची हो जाते हो…”

“कार्य करना और आराम करना जीवन के दो मुख्य अंग है. इनमे संतुलन स्थापित करने के लिए अपनी योग्यता का उपयोग करना चाहिये…”

“जीवन ऐसा कुछ नही है जिसके प्रति गंभीर रहा जाये. जीवन तुम्हारे हाथो में खेलने के लिए दी गयी एक गेंद के समान है. गेंद को कभी पकडे मत रखो…”

“यदि आप खुद के दिमाग पर काबू पा सकते हो, तो आपमें पूरी दुनिया को जितने की काबिलियत है…”

“बुद्धिमान वह है जो औरो की गलती से सीखता है. थोडा कम बुद्धिमान वह है जो सिर्फ अपनी गलती से सीखता है.. मुर्ख एक ही गलती बार-बार दोहराते रहते है और उनसे कभी नही सीखते…”

“ज्ञान बोझ है यदि वह आपके भोलेपन को छीनता है….”
“ज्ञान बोझ है यदि वह आपके जीवन में एकीकृत नही है….”
“ज्ञान बोझ है यदि वह प्रसन्नता नही लाता….”
ज्ञान बोझ है यदि वह आपको यह विचार देता है की आप बुद्धिमान है…
ज्ञान बोझ है यदि वह आपको स्वतंत्र नही करता…
“ज्ञान बोझ है यदि वह आपको ये प्रतीत कराता है की आप विशेष है…”

“भरोसा रखना की वहा आपकी कमजोरी को दूर करने के लिए कोई बैठा है. ठीक है, आप एक बार सोते हो, दो बार, तीन बार. ये कोई मायने नही रखता, मायने तो सिर्फ आपका आगे बढ़ना रखता है. इसीलिए कमजोरियों की चिंता किये बिना ही सतत आगे बढ़ते रहे….”

“चिंता करने से आपके जीवन में कोई बदलाव नही होंगा लेकिन काम करने से जरुर आप अपने आप को मजबूत बना सकते हो….”

“जीवन प्रकृति के बनाये नियमो पर चलता है….”

“जिनमे कोई यह नही जानता की एक दोस्त कब दुश्मन बन जाये या दुश्मन कब दोस्त बन जाये. इसीलिए हमेशा खुद पर भरोसा रखे…..”

“हम अपने गुस्से को क्यों काबु में नही करते? क्योकि हमें पूर्णता से प्यार है. इसीलिए जीवन में थोड़ी सी जगह अपूर्णता को भी दे तभी आप अपने गुस्से पर काबू पा सकते हो…..”

“शाश्वत इंतज़ार, अनंत धैर्य का होना बहोत जरुरी है. क्योकि जब आपके पास अनंत धैर्य होता है, तब आपको अपने पीछे भगवान को अनुभूति होती है. जबकी सतत प्रयास और कोशिश करते रहने से भी आप इसी जगह पर पहोच सकते हो….,”

“यदि कोई आपको सबसे ज्यादा ख़ुशी दे सकता है तो वह आपको दुःख भी दे सकता है….,”

“उस बात के लिए गुस्सा होना जो पहले से ही हो चुकी है, इसका कोई अर्थ नही है. आप हमेशा अपनी तरफ से पूरी कोशिश करते हो, नही करते तो बस आप घटित घटना को नए नजरिये से नही देखते….,”

“प्यार में कभी गिरना नही चाहिये, प्यार में हमेशा आगे बढ़ना चाहिये….,”

“मै आपको बताता हु की, आपके मस्तिष्क के अलावा कोई भी दुसरी चीज़ आपको परेशान नही कर सकती… हा, भले ही आपको ऐसा दिखाई देंगा की दुसरे आपको परेशान कर रहे हो लेकिन वह आपका मस्तिष्क ही होंग..,”

“अनंत मतलब सिमित चीजो या बातो को व्याप्त करना या विस्तृत करना है….”

“मानव विकास के दो चरण है – कुछ होने से कुछ ना होना, और कुछ ना होने से सबकुछ होना. यह ज्ञान दुनिया भर में योगदान और देखभाल ला सकता है….”

“श्रद्धा यह समझने में है की आप हमेशा वो पा जाते है जिसकी आपको जरुरत होती है….”

“जब भी आप अपना दुःख बाटते है, तो वह कम नही होता. जब आप अपनी ख़ुशी बाटने से रह जाते है, तो वह कम हो जाती है. अपनी समस्याओ को सिर्फ इश्वर को ही बताये, और किसी से नही. क्योकि ऐसा करने से आपकी समस्या बढेंगी. इसके विपरीत ख़ुशी सभी के साथ बाटनी चाहिये….”

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